सरकार के प्रभाव में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला,देंगे मुँहतोड़ जवाब-शिक्षक नेता डा० रुपक कुमार

उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता-डा०रुपक कुमार

हाजीपुर-सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की भांति सुविधा और वेतन देने के मामले पर सुरक्षित रखे फैसले को सुनाया। जिसमें शिक्षकों की हार और बिहार सरकार की जीत हुई। लगभग सभी शिक्षक संगठनों ने न्यायालय के इस फैसले पर असंतोष जाहिर किया हैं। उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता डाॅ. रुपक कुमार ने कहा कि देश मे वन मैन पाॅलिसी चल रही हैं, सभी स्वायत्त एवं स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएँ केन्द्र सरकार के हाथों का खिलौना बन चुकी है। समान काम समान वेतन पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने निष्पक्ष होकर नहीं बल्कि असमानता के भाव से और सरकार के प्रभाव मे आकर फैसला सुनया है। जिस तरह निरंतर बहस को देखा सुना गया उससे लग रहा था कि हमारे मौलिक अधिकार यानि समानता के अधिकार की रक्षा होगी और हम शिक्षकों को उचित सम्मान व समान अधिकार मिलेगा। परंतु सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के प्रभाव में आकर उम्मीद के विपरीत फैसला सुना दिया है।
समान काम समान वेतन की पहली और दूसरी सूनवाई जिसमें जस्टिस नरीमन ने बड़े ही सख्ती से बिहार सरकार के प्रतिनिधि से कहा था कि समान वेतन तो आपको हर हाल मे देना ही होगा, आप यह बताएँ कि कैसे दिजिएगा? अगर नहीं बताएँगे तो 50-50%की हिस्सेदारी बांट दुंगा। इसके बाद जस्टिस नरीमन को सूनवाई से ही अलग कर दिया गया। जस्टिस नरीमन को सुनवाई से अलग करना हमारे बयानो की पुष्टि करता हैं। पहले पटना उच्च न्यायालय ने समान काम के लिए समान वेतन देने का फैसला सुनाया था, पर नीतीश सरकार के हठ और अहंकार ने शिक्षकों को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित कर दिया। चार लाख से अधिक नियोजित शिक्षकों को अन्यायपूर्ण व्यवस्था मे शोषित होकर जीने पर मजबूर कर दिया। जरा बताईए क्या एक ही देश में एक ही पद और एक ही कार्य प्रकृति वाले शिक्षको के लिए अलग-अलग तरह से संविधान की व्याख्या की जाएगी? हम चूप नहीं बैठेंगे, हम सरकार के शिक्षक विरोधी नीतियों का जवाब आगामी विधानसभा चुनाव में मुँहतोड़ तरीके से देंगे।