शराबबंदी-नये फरमान के बाद “कहीं बद से बदतर” ना हो जाए हालात-एक रिपोर्ट- अवैध शराब का व्यापार अब राष्ट्रीय नही बल्कि अंतराष्ट्रिय व्यापार-

पटना-बिहार में शराबबंदी का सच किसी से छुपा नहीं है.राज्य सरकार के विभिन्न आंकड़ों में जो भी बताया जाए मगर सच यही है कि शराब भगवान की तरह कण- कण में उपलब्ध है.किसी शहर का ऐसा कोई चौक नहीं जहां शराब ना मिले,सुविधा इतनी जितनी शराब का व्यापार वैध होने के समय भी नहीं थी.ऐसा भी नहीं कह सकते कि सरकार शराबबंदी का प्रयास नहीं कर रही है.रोजाना शराब की खेप पकड़ी जाती है.शराब का सेवन करने वालों से लेकर शराब का व्यापार करने वालों तक लाखों लोग कानून के लपेटे में हैं,मगर फिर भी बंदी का कोई असर खास नहीं है.राज्य में कई प्रदेशों के निर्मित (मसलन पंजाब, झारखंड,उत्तर प्रदेश,हरियाणा आदि) शराब अवैध रूप से बिक रहे है.वैशाली जिले के हाजीपुर शहर मे तो गत दिनों भूटान निर्मित शराब भी पकड़ी गई है.मतलब अवैध शराब का व्यापार अब राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार बन चुका है.खैर धंधे से जुड़े लोग सोचते होंगे कि “गंदा है पर धंधा है “.

प्रतीकात्मक तस्वीर

बीते दिनों शराबबंदी पर एक समीक्षा बैठक में सुबे के मुखिया नीतीश कुमार ने एक नया फरमान जारी किया है.फरमान यह है कि सूबे के सभी थानों के थानेदार यह लिखित में देंगे कि उनके थाना क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री नहीं होती है.उसके बाद अगर संबंधित थाना क्षेत्र में शराब पकड़ी जाती है तो उक्त थानेदार,थानाध्यक्ष को अगले 10 सालों तक किसी भी थाने में पोस्टिंग नहीं दी जाएगी.हालाकीं यह फरमान अभी प्रक्रिया मे है.मगर यह फरमान लागु होता है तो इस फरमान के बाद पहली समस्या यह है कि,कौन थानेदार यह लिखित देने के बाद अपने थाना क्षेत्र में अवैध शराब की बरामदगी करेंगे.क्योंकि बरामदगी की एफआईआर होने के साथ ही उन्हे 10 सालों के लिए थाना का मोह छोड़ना होगा.
दूसरी और ताजा समस्या यह है कि नीतीश सरकार के इस फरमान के बाद बिहार पुलिस एसोसिएशन में काफी रोष है.बिहार पुलिस एसोसिएशन ने इस मामले पर सवाल खड़े कर दिए हैं.पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह के अनुसार एसोसिएशन का कहना है कि अगर दारोगा,इंस्पेक्टर रैंक में यह जिम्मेदारी तय की गई है तो वरीय अधिकारियों(एसपी,डीएसपी) की भी जिम्मेदारी तय की जाए,क्योंकि सम्मान और वीरता का पदक जब उन्हें मिलता है तो उनकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए.बिहार पुलिस एसोसिएशन की ओर से इस आशय का एक पत्र लेकर वह पुलिस महानिदेशक से मिल भी चुके हैं.
अगर यह नया फरमान लागु होता है तो भला शराब बरामदगी की समस्या कौन अपने सर पर लेना चाहेगा.और अगर सभी अपने बचाव में इस समस्या से बचते रहे तो निश्चित रूप से शराब कारोबारियों के हौसले बुलंद होंगे और बिहार में अवैध शराब का व्यापार अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक नई ऊंचाइयों को छुएगा.