राष्ट्र की प्रथम नागरिक की शपथ लेकर महामहिम ने रचा इतिहास

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
➖➖➖➖➖➖➖➖
नई दिल्ली – द्रौपदी मुर्मू ने आज संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में देश के पन्द्रहवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमणा ने उन्हें शपथ दिलाई।राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले द्रौपदी मूर्मु सुबह राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दीं। मुर्मू का राष्ट्रपति बनना कई लिहाज से ऐतिहासिक है। आजादी के पचहत्तरवें साल में देश का सर्वोच्च पद पहली बार आदिवासी समुदाय के किसी व्यक्ति को मिला है। वे आजादी के बाद पैदा होने वाली पहली और शीर्ष पद पर काबिज होने वाली सबसे कम उम्र की शख्सियत हैं। प्रतिभा पाटिल के बाद मुर्मू देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। संसद के सेंट्रल हॉल में शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पीएम नरेंद्र मोदी , केंद्रीय मंत्रियों , कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य गणमान्य लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद उन्होंने ट्राई सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया , इस दौरान उन्हें 21 तोपों की सलामी भी दी गई। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति भवन से विदाई के दौरान  कोविंद को ट्राई सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया , इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने नये आवास 12 जनपथ पहुंचे।

सफलता का मंत्र है सबका प्रयास , सबका कर्तव्य – राष्ट्रपति
➖➖➖➖➖➖➖➖
देश की पंद्रहवीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शपथग्रहण के बाद अपने संबोधन में कहा कि मैं भारत के समस्त नागरिकों की आशा-आकांक्षा और अधिकारों की प्रतीक इस पवित्र संसद से सभी देशवासियों का पूरी विनम्रता से अभिनंदन करती हूं। आपकी आत्मीयता , आपका विश्वास और आपका सहयोग मेरे लिये इस नये दायित्व को निभाने में मेरी बहुत बड़ी ताकत होंगे। उन्होंने कहा कि भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर निर्वाचित करने के लिये मैं सभी सांसदों और सभी विधानसभा सदस्यों का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं। आपका मत देश के करोड़ों नागरिकों के विश्वास की अभिव्यक्ति है। राष्ट्रपति ने कहा ये भी एक संयोग है कि जब देश अपनी आजादी के पचासवें वर्ष का पर्व मना रहा था तभी मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी और आज आजादी के पचहत्तरवें वर्ष में मुझे ये नया दायित्व मिला है। उन्होंने कहा कि मैं देश की ऐसी पहली राष्ट्रपति भी हूं जिसका जन्म आज़ाद भारत में हुआ है। हमारे स्वाधीनता सेनानियों ने आजाद हिंदुस्तान के हम नागरिकों से जो अपेक्षायें की थीं , उनकी पूर्ति के लिये इस अमृतकाल में हमें तेज गति से काम करना है।  इन 25 वर्षों में अमृतकाल की सिद्धि का रास्ता दो पटरियों पर आगे बढ़ेगा- सबका प्रयास और सबका कर्तव्य। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि कल यानि 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस भी है। ये दिन भारत की सेनाओं के शौर्य और संयम दोनों का ही प्रतीक है। मैं आज देश की सेनाओं को तथा देश के समस्त नागरिकों को कारगिल विजय दिवस की अग्रिम शुभकामनायें देती हूं। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी जीवन यात्रा ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से शुरू की थी।  मैं जिस पृष्ठभूमि से आती हूं , वहां मेरे लिये प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करना भी एक सपने जैसा ही था। लेकिन अनेक बाधाओं के बावजूद मेरा संकल्प दृढ़ रहा और मैं कॉलेज जाने वाली अपने गांव की पहली बेटी बनी। राष्ट्रपति ने कहा कि मैं जनजातीय समाज से हूं और वार्ड कौन्सिलर से लेकर भारत की राष्ट्रपति बनने तक का अवसर मुझे मिला है। यह लोकतंत्र की जननी भारतवर्ष की महानता है। ये हमारे लोकतंत्र की ही शक्ति है कि उसमें एक गरीब घर में पैदा हुई बेटी , दूर-सुदूर आदिवासी क्षेत्र में पैदा हुई बेटी , भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकती है। राष्ट्रपति द्रौपदी ने कहा कि राष्ट्रपति के पद तक पहुंचना मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है , ये भारत के प्रत्येक गरीब की उपलब्धि है। मेरा निर्वाचन इस बात का सबूत है कि भारत में गरीब सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है। मेरे लिये बहुत संतोष की बात है कि जो सदियों से वंचित रहे , जो विकास के लाभ से दूर रहे , वे गरीब – पिछड़े तथा आदिवासी मुझमें अपना प्रतिबिंब देख रहे हैं। मेरे इस निर्वाचन में पुरानी लीक से हटकर नये रास्तों पर चलने वाले भारत के आज के युवाओं का साहस भी शामिल है। ऐसे प्रगतिशील भारत का नेतृत्व करते हुये आज मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ। उन्होंने कहा कि संविधान के आलोक में मैं पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करूंगी। मेरे लिये भारत के लोकतांत्रिक-सांस्कृतिक आदर्श और सभी देशवासी हमेशा मेरी ऊर्जा के स्रोत रहेंगे। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस , नेहरू जी , सरदार पटेल , बाबा साहेब आंबेडकर , भगत सिंह , सुखदेव , राजगुरू , चन्द्रशेखर आज़ाद जैसे अनगिनत स्वाधीनता सेनानियों ने हमें राष्ट्र के स्वाभिमान को सर्वोपरि रखने की शिक्षा दी थी। रानी लक्ष्मीबाई , रानी वेलु नचियार , रानी गाइदिन्ल्यू और रानी चेन्नम्मा जैसी अनेकों वीरांगनाओं ने राष्ट्ररक्षा और राष्ट्रनिर्माण में नारीशक्ति की भूमिका को नई ऊंचाई दी थी। उन्होंने कहा कि मैं अपने देश के युवाओं से कहना चाहती हूं कि आप ना केवल अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं बल्कि भविष्य के भारत की नींव भी रख रहे हैं। देश के राष्ट्रपति के तौर पर मेरा हमेशा आपको पूरा सहयोग रहेगा। उन्होंने कहा कि मेरा जन्म तो उस जनजातीय परंपरा में हुआ है जिसने हजारों वर्षों से प्रकृति के साथ ताल-मेल बनाकर जीवन को आगे बढ़ाया है। मैंने जंगल और जलाशयों के महत्व को अपने जीवन में महसूस किया है। हम प्रकृति से जरूरी संसाधन लेते हैं और उतनी ही श्रद्धा से प्रकृति की सेवा भी करते हैं। मैंने अपने अब तक के जीवन में जन-सेवा में ही जीवन की सार्थकता को अनुभव किया है। जगन्नाथ क्षेत्र के एक प्रख्यात कवि भीम भोई जी की कविता की एक पंक्ति है। “मो जीवन पछे नर्के पड़ी थाउ, जगत उद्धार हेउ”। अर्थात, अपने जीवन के हित-अहित से बड़ा जगत कल्याण के लिये कार्य करना होता है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जगत कल्याण की भावना के साथ मैं आप सब के विश्वास पर खरा उतरने के लिये पूरी निष्ठा व लगन से काम करने के लिए सदैव तत्पर रहूंगी। उन्होंने कहा मैं चाहती हूं कि हमारी सभी बहनें व बेटियां अधिक से अधिक सशक्त हों तथा वे देश के हर क्षेत्र में अपना योगदान बढ़ाती रहें। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मैंने ओडिशा के गांव से जीवन यात्रा शुरू की है। ये पद मेरी उपलब्धि नहीं , बल्कि देश के गरीबों की उपलब्धि है। लोकतंत्र की शक्ति से यहां पहुंची हूं , मैं गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। मेरे लिये जनता का हित सर्वोपरि है।

कई देशों से मिली बधाई
➖➖➖➖➖➖➖
भारत की पन्द्रहवीं राष्ट्रपति बनने पर द्रौपदी को दुनियां भर के देशों से बधाईयां मिली हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पंद्रहवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने पर द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। मोदी ने कहा कि उनका देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को सम्हालना भारत के लिये ऐतिहासिक क्षण है। खासकर गरीबों , वंचितों और कमजोर वर्गों के लिये। मोदी ने ट्वीट में शपथ लेने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत की उपलब्धियों पर जोर दिया और आगे के रास्ते को लेकर एक भविष्यवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन की ओर से भेजे गये संदेश में कहा गया है कि एक आदिवासी महिला का राष्ट्रपति जैसे पद पर पहुंचना भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। उनका निर्वाचन प्रमाण है कि जन्म नहीं , व्यक्ति के प्रयास उसकी नियति तय करते हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र प्रमुख पद पर पहुंचना उनकी ऊंची शख्सियत का ही परिणाम है। उनके लिये ढेरों बधाइयां। फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मेक्रो ने कहा है मुर्मू को राष्ट्रपति बनने पर बधाई , महिलाओं को उनसे प्रेरणा मिलेगी। श्रीलंका में भी राजनीतिक दलों ने उन्हें खुले दिल से बधाइयां दीं। हाल ही में श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव हारने वाले डुलास अल्फापेरुमा ने कहा आजादी के बाद जन्म लेने वाली , जातीय और सांस्कृतिक रूप से दुनियां के सबसे अनोखे देश की राष्ट्रपति को बधाई। श्रीलंका के मुख्य विपक्षी दल समागी जन बालवेग्या के सजित प्रेमदास ने कहा है कि मुर्मू का उत्थान सभी लोकतांत्रिक देशों को अपने लोगों के लिये बेहतर प्रयास करने के लिये प्रेरित करेगा। नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने कहा है कि नेपाल सरकार और यहां के लोगों की ओर से दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र की राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर मैं मुर्मू को बधाई देता हूं। उम्मीद है कि दोनों देशों के परंपरागत संबंध आने वाले दिनों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे। वहींं राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर द्रोपदी मुर्मू को पाकिस्तान के मीडिया की भी सराहना मिली है।
गौरतलब है कि द्रौपदी मूर्मु का जन्म ओडिशा के मयूरगंज जिले के बैदपोसी गांव में 20 जून 1958 को हुआ था। द्रौपदी संथाल आदिवासी जातीय समूह से संबंध रखती हैं। उनके पिता का नाम बिरांची नारायण टुडू एक किसान थे। द्रौपदी के दो भाई हैं द्रौपदी का बचपन बेहद अभावों और गरीबी में बीता था। लेकिन अपनी स्थिति को उन्होंने अपनी मेहनत के आड़े नहीं आने दिया। मुर्मू की स्कूली पढ़ाई गांव में हुई। साल 1969 से 1973 तक वह आदिवासी आवासीय विद्यालय में पढ़ीं। इसके बाद स्नातक करने के लिये उन्होंने भुवनेश्वर के रामा देवी वुमंस कॉलेज में दाखिला ले लिया। मुर्मू अपने गांव की पहली लड़की थीं, जो स्नातक की पढ़ाई करने के बाद भुवनेश्वर तक पहुंची और बेटी को पढ़ाने के लिये वे शिक्षिका भी बनीं।द्रौपदी की शादी श्यामाचरण मुर्मू से हुई , उनसे दो बेटे और दो बेटी हुई।वर्ष 2014 में दिल का दौरा पड़ने से द्रौपदी के पति श्यामाचरण मुर्मू की भी मौत हो गई , वे बैंक में काम करते थे। वर्ष 20215 में द्रौपदी झारखंड की राज्यपाल बना दी गईं , जहां वे आज भी अपने कामों की वजह से जानी जाती हैं। अब द्रौपदी के परिवार में केवल बेटी इतिश्री मुर्मू हैं जो बैंक में नौकरी करती हैं।