मातृ दिवस — राष्ट्रीय सूचना प्रसारण आयुक्त अरविन्द तिवारी की कलम✍ से

माँ इस सृष्टि का सौंदर्य है , स्नेह उसकी प्रवृत्ति है तथा अनुदान उसका स्वभाव है । माँ जन्मदात्री है , रिश्ता का सबसे छोटा संबोधन और हमारे अस्तित्व में आने के बाद सबसे पहला शब्द माँ ही है जो जीवन का सबसे कीमती साथ भी होता है । समाज का प्रत्येक भावी सदस्य उसकी गोद में पलकर संसार में खड़ा होता है उसकी स्तन का अमृत पीकर हृष्ट पुष्ट होता है उसकी हंसी से हंसना और उसकी वाणी से बोलना सीखता है। माँ की ममता का कोई मोल नही है , जिसे माँ का प्यार नही मिलता वो बड़ा ही अभागा होता है । माँ बनना हर स्त्री की सपना होती है , वह बेटा बेटी में भेदभाव नही करती । माँ है तभी हम संपन्न हैं और बिना माँ के हम विपन्न हैं । माँ ममतामयी , करुणायी , वात्सल्यमयी होती है । माँ देवत्व की मूर्तिमान प्रतिमा है । कहा भी गया है —

नास्ति मातृ समो गुरू: , नास्ति भार्या सम: मित्रम् ।
नास्ति स्वसा समा भान्या , गृहेषु तनया भूषा ।।
अर्थात माता के समान गुरु नहीं है , पत्नी के समान मित्र नहीं है , घर में कन्या ही घर की शोभा है।

कहाँ गये आदर्श प्रेम के , कहाँ गयी निष्ठा सारी ।
देव वहीं रहते हैं सदा , जहां पूजी जाती है नारी ।।

आज 12 मई को देश भर में मातृ दिवस (Happy Mother’s Day) मनाया जा रहा है । मातृ-दिवस के अवसर पर बच्चा अपनी मां के प्रति अपने प्यार को व्यक्त करता है। हालांकि मां के लिये तो हर दिन एक दिन जैसा ही होता है इसलिये मां के लिये कोई विशेष दिन नहीं है । लेकिन अंग्रेज इसे बनाकर चले गये तो भारतीय इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और आज का दिन माँ को प्यार और सम्मान जताने का दिन है ।

माँ एक अनमोल इंसान के रूप में होती है जिसके बारे में शब्दों से बयाँ नहीं किया जा सकता है । माँ ने तो हमें जन्म दिया है , हमको लिखा है तो भला हम माँ के बारे में क्या लिख सकते हैं । ऐसा कहा जाता है कि भगवान हर किसी के साथ नहीं रह सकता इसलिये उसने माँ को बनाया । माँ हमारे जीवन की हर छोटी बड़ी जरूरतों का ध्यान रखने वाली और उन्हें पूरा करने वाली देवदूत होती है। कहने को वह इंसान होती है, लेकिन भगवान से कम नहीं होती।वहीं मन्दिर है, वही पूजा है और वही तीर्थ है। माँ के बारे में जितना लिखा जाये उतना ही कम है । उनके बारे में लिखना तो सूर्य को दीपक दिखाने के समान है ।

ममत्व एवं त्याग घर ही नहीं, सबके घट को उजालों से भर देता है. मां का त्याग, बलिदान, ममत्व एवं समर्पण अपनी संतान के लिए इतना विराट है कि पूरी जिंदगी भी समर्पित कर दी जाए तो मां के ऋण से उऋण नहीं हुआ जा सकता है. संतान के लालन-पालन के लिए हर दुख का सामना बिना किसी शिकायत के करने वाली मां के साथ बिताए दिन सभी के मन में आजीवन सुखद व मधुर स्मृति के रूप में सुरक्षित रहते हैं।

मां को सम्मान देने वाले इस दिन की शुरुआत अमेरिका से हुई। अमेरिकन एक्टिविस्ट एना जार्विस अपनी मां से बहुत प्यार करती थीं। उन्होंने न कभी शादी की और न कोई बच्चा था। वो हमेशा अपनी मां के साथ रहीं। वहीं, मां की मौत होने के बाद प्यार जताने के लिए उन्होंने इस दिन की शुरुआत की। फिर धीरे-धीरे कई देशों में मदर्स डे मनाया जाने लगा।