पटना के गांधी मैदान बम ब्लास्ट मामले में चार को सजा ए मौत

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
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पटना – स्थानीय ऐतिहासिक गांधी मैदान बम ब्लास्ट मामले में दोषी पाये गये नौ आरोपियों को एनआईए कोर्ट के जज गुरविंदर सिंह ने आज सजा सुना दिया। नौ आरोपियों में चार को फांसी की सजा , दो को उम्रकैद , दो को दस साल की सजा और एक को सात साल की सजा सुनायी है। इनमें दोषियों इम्तियाज अंसारी उर्फ आलम , हैदर अली उर्फ अब्दुल्लाह उर्फ ब्लैक ब्यूटी , नोमान अंसारी , मो० मुजीबुल्लाह अंसारी को फांसी की सजा सुनायी है। उमर सिद्धीकी और अजहरुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनायी है। इसके अलावा अहमद हुसैन और फिरोज असलम को दस-दस साल की सजा एवं एक दोषी इफ्तेखर आलम उर्फ पप्पू को सात वर्ष की सजा सुनायी है। जबकि अदालत ने इनमें से एक फखरूद्दीन को सबूत के अभाव में बरी कर दिया। गुनाहगारों को सजा के इस मुकाम तक पहुंचाने में एनआईए को आठ साल लग गये। इस दौरान कोर्ट में एनआईए ने 187 गवाह पेश किये।
गौरतलब है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा की ओर नरेंद्र मोदी को उम्मीद्वार बनाया गया था और उनके स्वागत में पटना के गांधी मैदान में हुंकार रैली का आयोजन किया गया था। तब 27 अक्‍टूबर 2013 को गांधी मैदान में नरेन्‍द्र मोदी की हुंकार रैली में इंडियन मुजाहिदीन के जिहादियों ने सीरियल ब्‍लास्‍ट किये थे। घटना उस समय हुई जब मोदी भाषण देने आने वाले थे। इन धमाकों ने सिर्फ पटना नहीं पूरे बिहार और देश को दहला कर रख दिया था। धमाकों में छह बेगुनाह लोगों की मौत हो गई थी जबकि 89 लोग घायल हुये थे। एनआईए ने ब्‍लास्‍ट मामले की जांच शुरू की। इसके पहले मामले में तीन केस दर्ज किये गये , बाद में तीनों केसों को मिलाकर एक केस बनाया गया। एनआईए की जांच और गुनहगारों को सजा के अंजाम तक पहुंचाने में सबसे अधिक योगदान इस केस के 187 गवाहों का रहा। एनआईए ने सभी जिहादियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में एक भी आरोपी को जमानत नहीं मिली। सभी आरोपी बेऊर जेल में बंद थे। पिछले 27 अक्‍टूबर को यानि घटना के ठीक आठ साल बाद उसी तारीख पर एनआईए कोर्ट ने नौ आरोपियों को दोषी करार दिया था। एक नवम्‍बर की सुबह सभी नौ आरोपियों को सजा सुनने के लिये बेऊर जेल से अदालत लाया गया , जहां अदालत ने सभी आरोपियों को सजा सुनायी।

मामले में तीन केस हुआ दर्ज
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इस घटना को लेकर पटना में दो और झारखंड के रांची के कोतवाली थाने में एक केस दर्ज किया गया था। पटना पुलिस ने पहली एफआईआर पटना जंक्शन के जीआरपी थाने में कांड संख्या 361/2013 और गांधी मैदान थाने में कांड संख्या 451/2013 दर्ज की। झारखंड पुलिस ने कोतवाली (हिंदपिडी) थाने में 985/2013 कांड दर्ज किया। एनआईए ने पटना जंक्शन के प्लेटफार्म 10 के नजदीक शौचालाय में हुये ब्लास्ट पर पटना जीआरपी थाना में दर्ज केस को 01 नंवबर 2013 को आरसी 10/ 2013, गांधी मैदान में हुये सीरियल ब्लास्ट मामले में गांधी मैदान थाना में दर्ज मामले को आरसी 1/2013 और आंतकी घटना को अंजाम देने के लिये साजिश रचने , विस्फोटक व अन्य प्रतिबंधित सामग्री इकट्ठा कर देश के विरुद्ध लड़ाई छेड़ने की साजिश रचने को लेकर रांची में दर्ज केस को आरसी 12/ 2013 दर्ज कर जांच शरू की थी। एनआईए ने इन तीनों एफआईआर को मिलाकर एक एफआईआर पटना जंक्शन जीआरपी थाना कांड संख्या 361/2013 सह एनआईए आरसी 10/ 2013 बनाई और जांच को अंजाम तक पहुंचाया।
पटना बम ब्लास्ट मामले में दोषी पाये गये नौ आतंकियों में रांची के छह , यूपी के एक और रायपुर के दो हैं। रांची के इम्तियाज अंसारी उर्फ आलम , हैदर अली उर्फ अब्दुल्लाह उर्फ करिया उर्फ ब्लैक ब्यूटी , नुमान अंसारी , इफ्तिखार आलम , फिरोज आलम उर्फ फिरोज असलम और मोजिबुल्लाह अंसारी के अलावा रायपुर के उमर सिद्दीकी , अजहरूद्दीन और यूपी मिर्जापुर के अहमद हुसैन को सजा मिली है।
सजा के ऐलान को लेकर सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेउर जेल से लेकर कोर्ट परिसर तक की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। कोर्ट में आने जाने वाले सभी लोगों की कड़ी जांच की जा रही थी।