दरकते रिश्ते मे विश्वास के मरहम से संजोए अपना भविष्य–डॉ॰ मनोज कुमार ——————————

आज ही खिले गुलाब को जैसे ही शिप्रा ने तोड़ने की कोशिश की उसके कोमल उंगली से खून सा रिसने लगा।यह दर्द उनके जिंदगी मे आये भूचाल से कम था ।शायद यही सोच एक झटके मे उसने अपनी अंगुलियों को गुलाब के पते से रगड़ लिया और पति की ओर मुंह बनाती किचन की ओर चली आयी।बरामदे मे बैठा पति विनित भी नजर चुराये अखबार पढता रहा।वह खुद मे द्वॊष भाव को छिपाता रहा।अचानक मोबाइल पर छाया का नं देख वह सकपाया और दुसरे कमरे मे चला गया।पति विनित की यह हरकत शिप्रा कई महीने से देख रही थी।वह महसूस करती थी कि वैवाहिक जीवन मे उनके पति कुछ खोये खोये से रहते है. हमेशा अपने रिश्ते मे एक खालीपन सा लिए जी रहे।उदास रहना,चिड़चिड़ापन,निराशा शादी के चार साल बाद भी साफ देखा जा रहा था।इधर विनित भी लगातार छाया के बारे मे सोचता ,कभी अपनी धर्मपत्नी शिप्रा की तुलना छाया व कार्यलय मे कार्यरत युवतीयों से करता ।बहुत बार खुद को असंतोष के गहरे दलदल मे पाता।अपनी मन की यह व्यथा उसे किशोरावस्था से ही थी.वह हर बार हर रिश्ते को शक की नजर से देखता ।आती जाती विपरीत लिंग से वह रिझता।अनचाहे रूप मे कभी भी किसी रिश्ते को निभा न पाया।बचपन मे उसे बहुत सारी अनावश्यक जिम्मेदारी का निर्हवन भी करना पड़ था।वह सच पूछिए तो अपनी इन जिम्मेदारी को निभाना उसकी मजबूरी रही।मेहनत करते उसने जिम्मेदारी को निभाया था और आज यहाँ तक पहुंचा था।वह अपनी इस आदत से छुटकारा चाह रहा था. पर न जाने क्यों वह विवाहित होते हुए भी विवाहेतर संबंधों को बढावा दे रहा था।उसे कुछ समझ नही आ रहा था और उसकी पत्नी शिप्रा उससे दूर हो रही थी।

बढ रहे ये मामले।

दरअसल विवाहेतर संबंधों में बढोत्तरी कई मामलों मे व्यक्तिगत कमियो को ही दर्शाता रहा है.कई बार इंसान एक ही रिश्ते या यू कहिए की जब आपसी तालमेल या विचारों के लगातार बेमेल होने पर महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों मे पर महिलाओं की तरफ झुकाव ज्यादा देखा जा रहा है।ऐसे मामले अब पटना मे भी महिलाओं मे देखे जा रहे है।
इसका मुख्य कारण मनोवैज्ञानिक व मनोसामाजिक भी रहा है।
पटना मे मेरे पास आ रहे काउंसलिंग कप्लस के व्यवहार अध्ययन के बाद पता चला की, पहली बात यह हैं कि ऐसे लोग आब्सेसिव कंम्पलसिव पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के शिकार होते है जो ज्यादातर अपने रिश्ते मे नयापन की उम्मीद रखते है।ज्यादातर मामले मे यह वो लोग है जिनका किशोरावस्था ठीक से नही बीता।बचपन से लेकर अबतक उनका जीवन संतोषजनक नही रहा है।
ऐसे लोग अपने रिश्ते को शक की नजर से देखते है और खामियां की पूर्ति हेतु अन्य से एक्स्ट्रा अफेयर कर पूरा करना चाहते है।
इन सब के लिए इनका अड़ियल रवैया भी जिम्मेवार है जो इनके व्यक्तित्व मे शामिल है।यह व्यवहार इनको झुकने नही देता और टूट कर कही और लग जाने के लिए मजबूर करता है ।नतीजतन लोग चुपचाप चोरीछिपे किसी दुसरे अतिरिक्त रिश्ते अपना लेते है वह भी लोकलाज के भय के साथ।
(लेखक डॉ॰ मनोज कुमार,बिहार के सुप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक हैं। इनका संपर्क नं 8298929114,9835498113 है।)