गुरू परंपरा से प्राप्त शंकराचार्य का अधिकार एक फूँक में नही मिट सकेगा — शंकराचार्य

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

रायपुर — अनन्त श्रीविभूषित पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के 76 वें प्राकट्य महामहोत्सव के पावन अवसर पर आज प्रात: 08:00 बजे से 11:00 बजे तक वैदिक विद्वानों द्वारा सुख- शांति- समृद्धि व जनकल्याणार्थ पूजन , आराधना , सामूहिक रूद्राभिषेक किया गया। तत्पश्चात 11:30 बजे से पुरी शंकराचार्य महाभाग का दिव्य दर्शन एवं पावन सानिध्य में धर्मोपदेश एवं आशीर्वचन पुरानी कृषि मंडी धमतरी में सुलभ हुआ ।
प्राकट्य उत्सव पर उपस्थित भक्तवृंद , शिष्यों को संबोधित करते हुये महाराज श्री ने राजनीतिक दलों को अपनी नीति व कार्यप्रणाली का शोधन करने , नकली शंकराचार्यों पर लगाम लगाने , शास्त्र सम्मत विधा का पालन करने एवं शास्त्र सम्मत राजनीति की परिभाषा का परिपालन पर विशेष जोर देते हुये धर्म निरपेक्षता की सही परिभाषा लोगों को बतायी । उन्होंने विधर्मियों पर कटाक्ष करते हुये कहा कि अरबों वर्षों से हमें गुरू परंपरा से शंकराचार्य के रूप में जो अधिकार और ज्ञान मिला है उसे कोई एक फूँक में मिटाने की कल्पना कैसे कर सकता है। हर राजनीतिक पार्टी द्वारा नकली शंकराचार्य बनाया जा रहा है जिस पर शीघ्र ही लगाम लगाने की आवश्यकता है। इसके पहले महाराज श्री ने सनातन धर्म के अनुयायियों की जिज्ञासाओं को शांत करते हुये कहा कि शून्य के आगे सभी अंक मोहमाया है । जब घटते हुये अंक में शून्य की प्राप्ति होती है तो वही मोहयुक्त शून्य ही ईश्वर है। जैसे किसी भी अंक के आगे शून्य जोड़ने से उसका मान बढ़ जाता है वैसे ही ईश्वर से जुड़ने वाले का भी सम्मान बढ़ जाता है । आज के प्राकट्य उत्सव में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक विशेष रूप से उपस्थित रहे । पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कल एक जुलाई को दोपहर भोजन , प्रसाद के पश्चात महाराजश्री रायपुर स्टेशन से शाम पाँच बजे दुर्ग पुरी इंटरसिटी से जगन्नाथपुरी के लिये रवाना होंगे।