गुप्त नवरात्रि — राष्ट्रीय सूचना प्रसारण आयुक्त अरविन्द तिवारी की कलम✍ से,जाने क्या है विशेष महत्व

नई दिल्ली – हिन्दू पूजा पद्धति में दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है और उसमें भी नवरात्रि का पर्व बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना गया है ।सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व बड़े ही श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। हिन्दू वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन, और माघ, मासों में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है जिसमें दो नवरात्र को प्रगट एवं शेष दो नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है ठीक उसी प्रकार से गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा अर्चना की जाती है । गुप्त नवरात्र बेहद फलदायी मानी जाती है जिसका महत्‍व प्रकट नवरात्रियों से भी अधिक होता है। गुप्त नवरात्रि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमीं तिथि तक मनायी जाती है जो इस बार आज तीन जुलाई से दस जुलाई तक रहेगी। तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिये इसे महाअवसर माना गया है । भक्त गण इस समय किसी एकांत गुप्त स्थान पर जाकर माता के विभिन्न स्वरूपों  के साथ दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। गुप्‍त नवारात्र में सिद्धिकुंजि का स्तोत्र का पाठ करना बहुत लाभदायक होता है। इस दौरान देवी माँ के भक्त बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं।
1.श्रद्धालुगण अपने सामर्थ्य के अनुसार घट-स्थापना से देवीपूजा का प्रारंभ किया जा सकता है।
2.देवी पूजन में दुर्गा सप्तशती के पाठ का बहुत महत्व है । यथासंभव नवरात्र के नौ दिनों में प्रत्येक श्रद्धालु को दुर्गासप्तशती का पाठ करना चाहिये किन्तु किसी कारणवश यह संभव नहीं हो तो देवी के नवार्ण मंत्र का जप यथाशक्ति अवश्य करना चाहिये।
3.नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन पूर्णाहुति हवन एवं कन्याभोज कराकर किया जाना चाहिये । पूर्णाहुति हवन दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से किये जाने का विधान है किन्तु यदि यह संभव ना हो तो देवी के नवार्ण मंत्र, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र अथवा दुर्गाअष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र से हवन संपन्न करना श्रेयस्कर रहता है।

  1. घर में लहसून , प्याज जैसे तामसिक चीजों का प्रयोग गुप्त नवरात्रि के दौरान बिल्कुल ना करें।