कौन सुनेगा!किसको सुनायें,अल्फाज अपने मन के उलझन की।-दर्द न बांट सकने का नया गम!अलेक्सीथाइमिया बीमारी।-डॉ॰ मनोज कुमार —————————

-सिमरन व रवि अभी एक साथ काम कर रहें। अपनी मेहनत व लगन से कामकाज में अव्वल हैं। रवि के समकक्ष दूसरे लोग अच्छी तरक्की पा चुके हैं।सिमरन हजारों रूपये कमा ससुराल की गृहस्थी चला रही लेकिन अबतक वो सम्मान न पा सकी जिसकी वह उम्मीद रखती है।पति राकेश भी समझ न पाते हैं उनकी यह मन की तकलीफ।वह कभी खुलकर कुछ बोल न सकी आजतक।सब उसे घमंडी व न जाने कई नामों से जानने लगे है।रवि दिनरात मेहनत की परकाष्ठा से अपने आफिस को नित्य आगे ले जा रहें लेकिन वह भी सहकर्मी का दिल न जीत सके,घर मे पत्नी व अन्य सदस्यों को अपना दुःख बांट न पा रहें हैं।अपनी भावनाओं को सिमटे- सिकोङे जीवन की पगडंडी पर ये लोग अभी चल रहें !…शायद कोई तो समझ पाये उन्हें ।उनके मर्म को परखा जाता।मन में मलाल भी समझता हर कोई मुझे ।
दरअसल रवि व सिमरन में अलेक्सीथाइमिया की मानसिक समस्या है।
क्या है यह विकार?
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यह एक मन की ऐसी दशा है जहाँ इंसान अपनी मनोभावों को शेयर नहीं कर पाता ।
उसको अपनी पीङा बताने में अत्यन्त असुविधा होतीं है।
कई बार भावनाओं को व्यवहार मे लाकर प्रदर्शित करने का जज्बा आता है लेकिन वर्णन कठिन हो जाता है।
नतीजतन मन की तरक्‍की रूक सी जाती है।
वह कर्म कर आगे बढ जाता है लेकिन यह मलाल की लोग उसको समझ पाते ।
आंकाझा बढती चली जाती है लोगो से और दूरी भी परिवार – समाज भर से।
इस समस्या का असर व्यक्तिगत,समाजिक-पारिवारिक व व्यवसायिक जीवन पर पङता है।
पता शायद व्यकित तब चलता है जब बचाने लायक पास कुछ न हो।

राह नहीं हैं मुश्किल ।

अपने मन की दीवारें को एकबार तोङने की जोखिम उठाया जाये तो बेहतरीन परिवर्तन होंगे। आस-पास के लोगों से जुङकर रहना,अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर शुरुआत किया जा सकता हैं।
एक बार मनोविश्लेषण जरूर करवा ले अगर आपके प्रयास से बदलाव में गतिशीलता न हों तब।
—-लेखक डॉ॰ मनोज कुमार बिहार के सुप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक हैं।
इनका संपर्क नं-9835498113 हैं।