कहीं एनडीए को भारी न पड़ जाए अपनों के बगावती तेवर, बाज़ी मार सकते हैं निर्दलीय

पटना-सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र से एनडीए गठबंधन की ओर से जदयू के प्रत्याशी डॉ० वरुण कुमार ने अपना सिंबल वापस कर दिया है!सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र में अपनी कमजोर पकड़ और अपने ही घटक दलों के नेताओं के बगावती तेवर का आभास उन्हें हो गया था,जिस कारण से उन्होंने पार्टी को सिंबल वापस करने का फैसला लिया!सिंबल वापस करने के तुरंत बाद एनडीए के शीर्ष नेताओं ने पूर्व मंत्री सह भाजपा नेता सुनील कुमार पिंटू को वहां से चुनाव लड़ाने का फैसला लिया! जिसके बाद आज सुनील कुमार पिंटू को एक कार्यक्रम में जदयू के कद्दावर नेता ललन सिंह के द्वारा भाजपा से जदयू की सदस्यता ग्रहण कराई गई,साथ ही लगे हाथ सीतामढ़ी से लोकसभा चुनाव लड़ने का सिंबल भी दे दिया गया! हालांकि इस फैसले के बाद भी एनडीए उम्मीदवार सुनील कुमार पिंटू कि मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं!एक निजी चैनल के सवाल पर जवाब देते हुए भाजपा के पूर्व एमएलसी बैजनाथ प्रसाद ने इस फैसले को पूर्णतया गलत बताया है, उनके दिए बयानों से स्पष्ट पता चलता है कि उनके तेवर सुनील कुमार पिंटू के हित में नहीं है! एनडीए के अपने ही नेताओं के बगावती तेवर उनको चुनाव पर भारी पड़ सकती है!हालांकि सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र के विभिन्न जगहों से मिल रही जानकारी के मुताबिक एनडीए की आपसी तकरार और महागठबंधन से मोहभंग होने की स्थिति में मतदाता सीतामढ़ी से भाजपा के टिकट के लिए पूर्व में प्रयासरत और सिंबल नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे अमित चौधरी उर्फ माधव चौधरी पर ध्यान केंद्रित कर सकती है! हालांकि माधव चौधरी का राजनीतिक इतिहास खास पुराना नहीं है,मगर विगत चंद सालों में एक अच्छे युवा समाजसेवी के रूप में अपनी पहचान इन्होंने सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र में बनाई है और इस बिनाह पर जनता उन्हें मौका दे सकती है!बहरहाल इन बनते बिगड़ते समीकरणों में दलों के बगावती तेवर अपनाए नेताओं के द्वारा भीतरघात की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है!
विशेष रिपोर्ट-रवि शर्मा