अक्षय तृतीया की महत्ता और विशेषता — राष्ट्रीय सूचना प्रसारण आयुक्त अरविन्द तिवारी की कलम ✍ से

आज अक्षय तृतीया है । आज ही के दिन माँ गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था । विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का अवतरण एवं माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था । द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था । कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था । कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था । सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था । ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था । प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोला जाता है । बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रह चरण के दर्शन होते है अन्यथा साल भर वो बस्त्र से ढके रहते है । आज के दिन ही महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था । अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है , यह तिथि भारतीय संस्कृति का सर्वोत्तम मुहूर्त माना जाता है।कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ किया जा सकता साथ ही इस दिन विशेष पूजा अर्चना और अनुष्ठान किया जाता है । आज के दिन माँ अन्नपूर्णा का जन्म और कुबेर को खजाना मिलने के कारण इसकी विशेष महत्व है । आज के दिन दान पुण्य करने , खरीदी करने और माँ महालक्ष्मी की पूजा आराधना करने का फल अक्षय होता है जो कभी नष्ट नही होता ।आज का हिंदू पर्व अक्षय तृतीया धन धान्य के उत्सव और मां लक्ष्मी की आराधना का भी पर्व है । इस दिन लोग सोने और बेशकीमती चीजों की खरीद करते हैं । आज तीन प्रमुख ग्रहों का गोचर उच्च राशि में रहेगा । सूर्य मेष, चंद्रमा वृषभ, शुक्र मीन राशि में रहेंगे. ये तीनों ग्रह अपनी-अपनी उच्च राशि में रहेंगे , सूर्य के साथ बुध की युति होने से बुधादित्य योग भी बन रहा है ।

महालक्ष्मी के पांच खास मंत्र-

1- महालक्ष्मी गायत्री

।। ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ।।

आज इस लक्ष्मी गायत्री मंत्र पढ़ने से मां लक्ष्मी की असीम कृपा बरसती है और धीरे- धीरे धन की परेशानी खत्म होने लगती है।

धनवान बनने के लिए विष्णु लक्ष्मी मंत्र

।। ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम: ।।

3- दुर्गा सप्तशती के निम्न मंत्र का जाप अक्षय तृतीया के दिन करने से सभी बाधाओं का नाश होता है और घर में सुख समृद्धि आती है –

।। ॐ सर्वाबाधा विर्निमुक्तो धनधान्यसुतान्वित:, मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय: ।।

4- श्री सुक्तम का पाठ करने मात्र से ही भक्त के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और मां महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं श्री सुक्तम मां महालक्ष्मी के 16 मंत्रों का संग्रह है ।